अजनबी हैं न हम…

अजनबी हैं न हम – Ajnabi Hain Na Hum -Hariharan

अजनबी हैं न हम एक ऐसा गीत है, जो अपने भावुक बोल और मेलोडियस संगीत के कारण संगीत प्रेमियों के दिलों में गहरे उतर जाता है। इस गीत को गाया है महान गायक हरिहरन ने, संगीत दिया है जॉली मुखर्जी ने और इसके बोल लिखे हैं डाॅ. सफ़ी हसन ने। आइए, इस गीत के हर पहलू को विस्तार से जानें और समझें कि किस तरह यह गीत श्रोताओं के दिलों में अपनी जगह बनाता है।

हरिहरन की सुरमई आवाज़

हरिहरन भारतीय संगीत जगत के उन गायक कलाकारों में से हैं, जिनकी आवाज़ में गहराई और भावनाओं का अद्वितीय मिश्रण मिलता है। अजनबी हैं न हम गीत में हरिहरन ने अपनी गायकी की सूक्ष्मता और नर्माई का प्रदर्शन करते हुए गीत के हर शब्द में जान डाल दी है। उनकी आवाज़ इस गीत में एक सजीवता प्रदान करती है, जो सीधे श्रोताओं के दिलों तक पहुंचती है।

हरिहरन की गायकी की एक खासियत यह है कि वे गीत के भावनात्मक पहलुओं को बहुत ही प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हैं। इस गीत में उनके स्वर प्रेम, अनिश्चितता और मिलन की भावना को दर्शाते हैं, जिससे श्रोता गीत के साथ एक गहरा नाता महसूस करते हैं।

जॉली मुखर्जी का संगीत: सौम्यता और मधुरता का संगम

जॉली मुखर्जी ने इस गीत के संगीत में ऐसी धुनें तैयार की हैं, जो सुनने वालों के कानों को सुकून और दिल को शांति देती हैं। उनका संगीत बहुत ही संतुलित है, जिसमें शास्त्रीय और आधुनिक संगीत का सुंदर मिश्रण दिखाई देता है।

जॉली मुखर्जी ने हरिहरन की आवाज़ को मुख्य केंद्र में रखते हुए संगीत को इस तरह से तैयार किया है कि यह गीत की भावनाओं को और गहराई से उभारता है। संगीत के बैकग्राउंड में धीमे सुरों का इस्तेमाल और वाद्य यंत्रों की सादगी इस गीत को एक खास एहसास दिलाती है।

गीत के बोल: डाॅ. सफ़ी हसन का गहन लेखन

डाॅ. सफ़ी हसन के लिखे इस गीत के बोल सरल होने के साथ ही बहुत ही भावपूर्ण हैं। उनके शब्द प्रेम और जुड़ाव की उस भावना को व्यक्त करते हैं, जो किसी भी श्रोता को गहराई से प्रभावित करती है।

गीत के बोलों में एक ऐसी अनकही कहानी छिपी हुई है, जो प्रेम और मित्रता के बीच के संबंधों को दर्शाती है। सफ़ी हसन ने शब्दों का बहुत ही समझदारी से चयन किया है, जिससे इस गीत की भावनाएं और भी जीवंत हो जाती हैं।

गीत की अपील और लोकप्रियता

अजनबी हैं न हम गीत ने श्रोताओं के दिलों में गहरी छाप छोड़ी है। हरिहरन की मधुर आवाज़, जॉली मुखर्जी का सूक्ष्म संगीत और डाॅ. सफ़ी हसन के भावपूर्ण बोल इस गीत को अविस्मरणीय बनाते हैं। इस गीत की अपील इसके सरल लेकिन गहरे बोल और संगीत की धुनों में छिपी है, जो श्रोताओं को बार-बार इसे सुनने पर मजबूर कर देती है।

अजनबी हैं न हम
अजनबी हैं न हम

अजनबी हैं न हम – Ajnabi Hain Na Hum Song Details 

  • Movie/Album: ग़ज़ल
  • Year : 1989
  • Music By: जॉली मुखर्जी
  • Lyrics By: डाॅ. सफ़ी हसन
  • Performed By: हरिहरन

अजनबी हैं न हम – Ajnabi Hain Na Hum Song Lyrics

अजनबी हैं न हम पराए हैं
तेरे ही जिस्म-ओ-जाॅं के साए हैं
अजनबी हैं न हम…

इक तेरे ऐतबार की ख़ातिर
दिल ने कितने फ़रेब खाए हैं
तेरे ही जिस्म…

ज़िन्दगी से गिला किया ही नहीं
ज़ख़्म खाए हैं मुस्कुराए हैं
तेरे ही जिस्म…

तूने उड़ती सी इक नज़र की थी
हमने ख़्वाबों के घर बसाए हैं
तेरे ही जिस्म…

एक तू है कि तेरे राहों में
ख़ुद हवा ने दीये जलाए हैं
तेरे ही जिस्म…

अजनबी हैं न हम – Ajnabi Hain Na Hum Video Song 

 

 

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