अब के बरसात की रुत – Ab Ke Barsaat Ki Rut (Chitra Singh, Someone Somewhere)
अब के बरसात की रुत: एक परिचय
ग़ज़ल एक ऐसा संगीत शैली है जो हमारे दिल और आत्मा को छू लेती है। और जब बात होती है “अब के बरसात की रुत” की, तो यह ग़ज़ल एल्बम 1990 के दशक में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इस लेख में, हम इस एल्बम के हर पहलू को विस्तार से जानेंगे और समझेंगे कि क्यों यह आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसी हुई है।
1990 का दशक भारतीय संगीत के लिए एक स्वर्णिम युग था। उस समय कई ग़ज़ल और शायरी आधारित एल्बम्स ने जन्म लिया और उनमें से एक प्रमुख नाम है “समवन समवेयर 1990″। इस एल्बम ने अपने समय में एक नई दिशा दी और ग़ज़ल प्रेमियों के बीच एक अलग ही पहचान बनाई।
“अब के बरसात की रुत” एल्बम का निर्माण समवन समवेयर 1990 में हुआ था। इस एल्बम का निर्माण एक ऐसे समय में हुआ जब संगीत में शायरी और ग़ज़ल की प्रमुखता बढ़ रही थी।
अब के बरसात की रुत
अब के बरसात की रुत – Ab Ke Barsaat Ki Rut Ghazal Details
- Movie/Album: समवन समवेयर
- Year 1990
- Music By: जगजीत सिंह
- Lyrics By: मुज़फ़्फ़र वारसी
- Performed By: चित्रा सिंह
- Song :- Ab Ke Barsat Ki Rut
- Artist :- Chitra Singh
- Music Director :-Jagjit Singh
- Lyricist :- Muzaffar Warsi
- Mood :: Melancholy
- Theme :: Nostalgia
- Label :: Saregama India Ltd
अब के बरसात की रुत – Ab Ke Barsaat Ki Rut Lyrics in Hindi
अब के बरसात की रुत और भी भड़कीली है
जिस्म से आग निकलती है, क़बा गीली है
अब के बरसात की…
सोचता हूँ के अब अंजाम-ए-सफ़र क्या होगा
लोग भी काँच के हैं, राह भी पथरीली है
अब के बरसात की…
पहले रग-रग से मेरी ख़ून निचोड़ा उसने
अब ये कहता है के रंगत ही मेरी पीली है
अब के बरसात की…
मुझ को बे-रंग ही कर दे न कहीं रंग इतने
सब्ज़ मौसम है, हवा सुर्ख़, फ़िज़ा नीली है
अब के बरसात की…

