इधर का माल उधर

इधर का माल उधर – Idhar Ka Maal Udhar – Bhupinder Singh

गीत का परिचय

“इधर का माल उधर” एक ऐसा गीत है जो अपने समय में बेहद लोकप्रिय हुआ। इस गीत को भूपिंदर सिंह ने अपनी गहरी और भावपूर्ण आवाज़ में गाया है। इसके संगीतकार महान राहुल देव बर्मन हैं, और गीत के बोल मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी ने लिखे हैं। यह गीत अपनी चुटीली शैली और दिलचस्प शब्दावली के कारण संगीत प्रेमियों के बीच आज भी याद किया जाता है।

गीत के बोल और उनकी विशिष्टता

साहिर लुधियानवी के लिखे इस गीत के बोल बेहद अनूठे हैं। उन्होंने अपनी खास शैली में इस गीत को लिखा है, जिसमें समाज के विभिन्न पहलुओं पर एक व्यंग्यात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। इस गीत के शब्द सीधे-सीधे समाज में चल रही असमानताओं और अनियमितताओं पर चोट करते हैं, लेकिन बेहद मनोरंजक तरीके से।

संगीत और ध्वनि की बेमिसाल कला

राहुल देव बर्मन ने इस गीत के संगीत को बेहद कुशलता से तैयार किया है। उन्होंने संगीत में अलग-अलग ध्वनियों और वाद्यों का इस्तेमाल किया है, जिससे यह गीत एक खास अनुभव देता है। उनका संगीत इस गीत को एक विशिष्ट धुन और आकर्षण प्रदान करता है, जो इसे और भी यादगार बना देता है।

गायन की विशेषताएँ

भूपिंदर सिंह की आवाज़ इस गीत की जान है। उन्होंने इस गीत को बहुत ही सरलता और सहजता से गाया है, लेकिन उनकी आवाज़ में एक ऐसी गहराई है जो श्रोताओं को गीत के बोलों और भावनाओं से जोड़ देती है। उनकी गायकी में जो सहजता और सहजता है, वह इस गीत को और भी खास बना देती है।

गीत का प्रभाव और लोकप्रियता

“इधर का माल उधर” उस समय का एक अत्यधिक लोकप्रिय गीत था और आज भी इसे संगीत प्रेमियों के बीच सराहा जाता है। यह गीत अपने समय के समाजिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य पर एक व्यंग्य है, जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया। इसका अनोखा संगीत और विशेष बोल आज भी इसे एक कालजयी रचना बनाए हुए हैं।

गीत की सफलता के प्रमुख कारण

इस गीत की सफलता के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। सबसे पहले, साहिर लुधियानवी के लिखे हुए बोल जो समाज की वास्तविकताओं को बहुत ही रोचक और व्यंग्यात्मक तरीके से प्रस्तुत करते हैं। दूसरा, राहुल देव बर्मन का अनोखा संगीत जो इस गीत को एक अलग ही स्तर पर ले जाता है। तीसरा, भूपिंदर सिंह की आवाज़ जो गीत की भावना को पूरी तरह से जीवंत करती है।

गीत का सारांश

“इधर का माल उधर” एक ऐसा गीत है जो श्रोताओं को सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करता है। इस गीत के बोल, संगीत, और गायकी सभी ने मिलकर इसे एक ऐसी रचना बना दिया है जो समय की सीमाओं को पार कर चुकी है और आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।

निष्कर्ष

“इधर का माल उधर” एक अनमोल संगीत रचना है जो समाज के विभिन्न पहलुओं पर तीखा व्यंग्य करती है। इसके बोल, संगीत और गायकी का समन्वय इसे एक अद्वितीय गीत बनाता है, जो हर समय के श्रोताओं के दिलों में अपनी जगह बनाए रखता है।

इधर का माल उधर

इधर का माल उधर

इधर का माल उधर – Idhar Ka Maal Udhar Song Credits

  • Movie/Album: दीवार
  • Year : 1975
  • Music By: राहुल देव बर्मन
  • Lyrics By: साहिर लुधियानवी
  • Performed By: भूपिंदर सिंह

इधर का माल उधर – Idhar Ka Maal Udhar Lyrics in Hindi

इधर का माल, उधर का माल
इधर का माल उधर जाता है
उधर का माल, इधर आता है
अरे हम सब जाने, हम सब जाने
अरे हम सब जाने
किधर-किधर कितना गफला हो जाता है
इधर का माल उधर…

ऐ कितना धंधा कानूनी है
कितना धंधा चोरी का
सागर-सागर फैला रहा है
जाल सुनहरी डोरी का
अरे माल पकड़ कर कोई-कोई
कितना माल बनता है
हम सब जाने…

ऐ चोरों से कुतवाल मिले तो
फिर चोरी कब रूकती है
मजदूरों से आँख मिला ते
आँख सभी की झुकती है
कस्टम से नेताओं के घर तक
किसका किससे नाता है
हम सब जाने…

इधर का माल उधर – Idhar Ka Maal Udhar Video Song

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