भर दो झोली मेरी – Bhar Do Jholi Meri – Adnan Sami
फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ का गाना “भर दो झोली मेरी” एक ऐसा गीत है जो हर किसी के दिल को छू जाता है। यह गाना न केवल अपनी सुरीली धुन के लिए बल्कि इसके गहरे भावनात्मक अर्थ के लिए भी जाना जाता है।
“भर दो झोली मेरी” मूलतः एक कव्वाली है, जो एक सूफी संगीत शैली है। कव्वाली का महत्व सूफी परंपरा में बहुत अधिक है, क्योंकि यह एक प्रकार का आध्यात्मिक संगीत है जो दिल को परमात्मा से जोड़ता है।

भर दो झोली मेरी – Bhar Do Jholi Meri song Details
- Movie/Album: बजरंगी भाईजान
- Year : 2015
- Music By: प्रीतम चक्रबर्ती
- Lyrics By: कौसर मुनीर
- Performed By: अदनान सामी
भर दो झोली मेरी – Bhar Do Jholi Meri Lyrics in Hindy
तेरे दरबार में दिल थाम के वो आता है
जिसको तू चाहे, हे नबी तू बुलाता है
तेरे दर पर सर झुकाए मैं भी आया हूँ
जिसकी बिगड़ी हाय नबी चाहे तू बनाता है
भर दो झोली मेरी या मुहम्मद
लौट कर मैं ना जाऊँगा खाली
भर दो झोली मेरी या मुहम्मद
लौट कर मैं ना जाऊँगा खाली
बंद दीदों में भर डाले आँसू
सिल दिए मैंने दर्दों को दिल में
जब तलक तू बना दे ना बिगड़ी
दर से तेरे ना जाए सवाली
भर दो झोली मेरी…
भर दो झोली, आका जी
भर दो झोली, हम सबकी
भर दो झोली, नबी जी
भर दो झोली मेरी सरकार-ए-मदीना
लौट कर मैं ना जाऊँगा खाली
खोजते-खोजते तुझको देखो
क्या से क्या या नबी हो गया हूँ
बेखबर दर-ब-दर फिर रहा हूँ
मैं यहाँ से वहाँ हो गया हूँ
दे दे या नबी मेरे, दिल को दिलासा
आया हूँ दूर से मैं हो के रुआँसा
कर दे करम नबी, मुझ पे भी ज़रा सा
जब तलक तू, जब तलक तू
पनाह दे ना दिल की
दर से तेरे ना जाए सवाली
भर दो झोली मेरी…
जानता है ना तू क्या है दिल में मेरे
बिन सुने गिन रहा है न तू धड़कनें
आह निकली है तो चाँद तक जायेगी
तेरे तारों से मेरी दुआ आएगी
ऐ नबी हाँ कभी तो सुबह आएगी
जब तलक तू सुनेगा ना दिल की
दर से तेरे न जाए सवाली
भर दो झोली मेरी…
दे तरस खा तरस मुझपे आका
अब लगा ले तू मुझको भी दिल से
जब तलक तू मिला दे ना बिछड़ी
दर से तेरे न जाए सवाली
भर दो झोली मेरी…
भर दो झोली, आका जी
भर दो झोली, हम सबकी
भर दो झोली, नबी जी
भर दो झोली मेरी सरकार-ए-मदीना
लौट कर मैं ना जाऊँगा खाली
दम-दम अली-अली दम अली-अली
दम अली-अली दम अली-अली…
