मेरे रश्के कमर ….

मेरे रश्के कमर – Mere Rashke Qamar – Rahat Fateh Ali Khan, Tulsi Kumar

राहत फ़तेह अली खान और तुलसी कुमार की मनमोहक आवाज़ें

“मेरे रश्के क़मर” गीत में राहत फ़तेह अली खान और तुलसी कुमार की आवाज़ों का संगम एक अनमोल धरोहर की तरह सामने आता है। राहत फ़तेह अली खान की गहराई से भरी आवाज़ और तुलसी कुमार की सुरीली तानें इस गीत को एक विशेष ऊंचाई पर ले जाती हैं। राहत की आवाज़ में जो सूफियाना अंदाज़ है, वह इस गीत को और भी गहराई और अर्थपूर्ण बना देता है, जबकि तुलसी कुमार की कोमल आवाज़ इसमें एक नाज़ुकता और सौंदर्य भर देती है।

तनिष्क बागची का संगीत: पारंपरिक और आधुनिकता का संगम

इस गीत का संगीत तनिष्क बागची द्वारा रचा गया है, जिन्होंने इसे पुराने और नए संगीत का एक बेहतरीन मिश्रण बना दिया है। तनिष्क ने इस गीत में पारंपरिक धुनों को आधुनिक संगीत के साथ जोड़कर एक ऐसा माहौल तैयार किया है, जो श्रोता को बांधे रखता है। उनकी संगीत रचना गीत के हर पहलू को एक नये अंदाज़ में प्रस्तुत करती है, जिससे यह गीत हर उम्र के लोगों को पसंद आता है।

मनोज मुन्तशिर और फ़ना बुलंद शहरी के अनमोल बोल

“मेरे रश्के क़मर” के बोल मनोज मुन्तशिर और फ़ना बुलंद शहरी द्वारा लिखे गए हैं। इन बोलों में प्रेम की गहराई, सौंदर्य और उसकी सुंदरता को बहुत ही खूबसूरती से व्यक्त किया गया है। मनोज मुन्तशिर के लेखन में एक सरलता है, जो सीधे दिल को छू जाती है, जबकि फ़ना बुलंद शहरी के बोलों में एक पारंपरिक तासीर है, जो इस गीत को एक अमरत्व प्रदान करती है।

गीत के बोलों का विश्लेषण

“मेरे रश्के क़मर” के बोलों में प्रेम की उन भावनाओं को शब्द दिया गया है, जो कभी-कभी व्यक्त करना मुश्किल हो जाता है। इन बोलों में इश्क के उन क्षणों को बड़ी खूबसूरती से व्यक्त किया गया है, जो सुनने वाले को अपने प्यार की यादों में खो जाने पर मजबूर कर देते हैं। गीत का हर शब्द प्रेम की गहराई और उसके सौंदर्य को उजागर करता है।

संगीत और भावनाओं का मिश्रण

तनिष्क बागची का संगीत और राहत फ़तेह अली खान तथा तुलसी कुमार की आवाज़ें मिलकर इस गीत को एक अलग ही स्तर पर ले जाते हैं। इस गीत के संगीत में एक मिठास और गहराई है, जो श्रोता के दिल को छू जाती है और उन्हें गीत के साथ जुड़ाव महसूस कराती है।

निष्कर्ष

“मेरे रश्के क़मर” एक ऐसा गीत है, जो प्रेम, सौंदर्य और उसकी अभिव्यक्ति का प्रतीक है। राहत फ़तेह अली खान और तुलसी कुमार की आवाज़ें, तनिष्क बागची का संगीत और मनोज मुन्तशिर तथा फ़ना बुलंद शहरी के बोल, यह सभी मिलकर इस गीत को एक अमर प्रेम गीत बनाते हैं। यह गीत श्रोता के दिल में एक गहरी छाप छोड़ता है, जिसे बार-बार सुनने का मन करता है।

मेरे रश्के कमर
मेरे रश्के कमर

मेरे रश्के कमर – Mere Rashke Qamar Song Credit’s…

  • Movie/Album: बादशाहो (2017)
  • Music By: तनिष्क बागची
  • Lyrics By: मनोज मुन्तशिर, फ़ना बुलंद शहरी
  • Performed By: राहत फ़तेह अली खान

मेरे रश्के कमर – Mere Rashke Qamar Lyrics in Hindi 

राहत फ़तेह अली खान
ऐसे लहरा के तू रूबरू आ गयी
धड़कने बेतहाशा तड़पने लगीं
तीर ऐसा लगा, दर्द ऐसा जगा
चोट दिल पे वो खायी, मज़ा आ गया
मेरे रश्के क़मर
मेरे रश्के क़मर, तूने पहली नज़र
जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया

जोश ही जोश में, मेरी आगोश में
आ के तू जो समाई, मज़ा आ गया
मेरे रश्के क़मर…

रेत ही रेत थी मेरे दिल में भरी
प्यास ही प्यास थी ज़िन्दगी ये मेरी
आज सेहराओं में इश्क के गाँव में
बारिशें घिर के आई, मज़ा आ गया
मेरे रश्के क़मर…

ना अनजान हो गया हम फ़ना हो गए
ऐसे तू मुस्कुरायी, मज़ा आ गया
मेरे रश्क-ए-क़मर..
बर्फ सी गिर गई, काम ही कर गई
आग ऐसी लगाई, मज़ा आ गया

तुलसी कुमार
यूँ लगा कोयलें, जब लगीं कूकने
जैसे छलनी किया हमको बन्दूक ने
हूख उठने लगी हँसते-हँसते मेरी
आँख यूँ डबडबाई, मज़ा आ गया
तूने रश्के कमर, कह दिया जब मुझे
ज़िन्दगी मुस्कुराई, मज़ा आ गया
उफ़ ये दीवानगी, आशिकी ने तेरी
ख़ाक ऐसी उड़ाई, मज़ा आ गया
मेरे रश्के कमर…

ऐसे लहरा के तू रूबरू आ गया
धड़कने बेतहाशा तड़पने लगीं
तीर ऐसा लगा, दर्द ऐसा जगा
चोट दिल पे वो खायी, मज़ा आ गया
तूने रश्के क़मर
तूने रश्के क़मर, कह दिया जब मुझे
ज़िन्दगी मुस्कुराई, मज़ा आ गया
सांवली शाम में, रंग से भर गए
थाम ली जब कलाई, मज़ा आ गया
मेरे रश्के कमर…

मेरे रश्के कमर – Mere Rashke Qamar Video Song…

 

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