राम को देख कर के जनक नंदिनी – Ram Ko Dekh Ke Janak Nandini, Prakash Gandhi
“Ram Ko Dekh Ke Janak Nandini” इस पंक्ति से ही भजन की आत्मा झलकती है। यह भाव माता सीता के उस भावनात्मक क्षण का वर्णन करता है जब उन्होंने भगवान श्रीराम को पहली बार देखा। इस भजन के बोलों में श्रृंगार रस और भक्ति रस का अनोखा समन्वय देखने को मिलता है। भजन में वर्णन है कि कैसे एक क्षण मात्र में सीता का मन प्रभु श्रीराम में रम गया।

राम को देख कर के जनक नंदिनी – Ram Ko Dekh Ke Janak Nandini Bhajan Credits
- Title :- Ram Ko Dekh Kar Shree Janak Nandini
- Singer :- Prakash Gandhi
- Music :- Gandhi Brothers
- Lyrics :- Traditional
राम को देख कर के जनक नंदिनी – Ram Ko Dekh Ke Janak Nandini Bhajan Lyrics
राम को देख कर के जनक नंदिनी,
बाग में वो खड़ी की खड़ी रह गयी।
राम देखे सिया को सिया राम को,
चारो अँखिआ लड़ी की लड़ी रह गयी॥
यज्ञ रक्षा में जा कर के मुनिवर के संग,
ले धनुष दानवो को लगे काटने।
एक ही बाण में ताड़का राक्षसी,
गिर जमी पर पड़ी की पड़ी रह गयी॥
राम को मन के मंदिर में अस्थान दे
कर लगी सोचने मन में यह जानकी।
तोड़ पाएंगे कैसे यह धनुष कुंवर,
मन में चिंता बड़ी की बड़ी रह गयी॥
विश्व के सारे राजा जनकपुर में जब,
शिव धनुष तोड़ पाने में असफल हुए।
तब श्री राम ने तोडा को दंड को,
सब की आँखे बड़ी की बड़ी रह गयी॥
तीन दिन तक तपस्या की रघुवीर ने,
सिंधु जाने का रास्ता न उनको दिया।
ले धनुष राम जी ने की जब गर्जना,
उसकी लहरे रुकी की रह गयी॥
