बाँके बिहारी की बाँसुरी बाँकी – Banke Bihari Ki Bansuri Banki, Ravindra Jain
“Banke Bihari Ki Bansuri Banki” एक अत्यंत भक्तिपूर्ण भजन है, जो श्रीकृष्ण की बांसुरी की महिमा और उसके दिव्य प्रभाव को प्रकट करता है। रविंद्र जैन जी की मधुर आवाज़ और भजन की भक्ति-भावना इसे और भी प्रभावशाली बना देती है। इसे सुनते ही भक्तों का मन वृंदावन की गलियों में घूमने लगता है और वे श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित हो जाते हैं।

बाँके बिहारी की बाँसुरी बाँकी – Banke Bihari Ki Bansuri Banki Bhajan Credits:
- Publisher: RJ Group
- Music Director: Ravindra Jain
- Lyricist: Ravindra Jain
- Singer: Ravindra Jain
बाँके बिहारी की बाँसुरी बाँकी – Banke Bihari Ki Bansuri Banki Bhajan Lyrics
बाँके बिहारी की बाँसुरी बाँकी,
पे सुदो करेजा में घाव करे री,
मोहन तान ते होए लगाव तो,
औरन ते अलगाव करे री,
गैर गली घर घाट पे घेरे,
गैर गली घर घाट पे घेरे,
कहाँ लगी कोउ बचाउ करे री,
जादू पड़ी रस भीनी छड़ी मन,
पे तत्काल प्रभाव करे री,
जादू पड़ी रस भीनी छड़ी मन,
पे तत्काल प्रभाव करे री ॥
मोहन नाम सो मोह न जानत,
दासी बनायीं के देत उदासी,
छोड़ चली धन धाम सखी सब,
बाबुल मैया की पाली पनासी,
एक दिना की जो होए तो झेले,
एक दिना की जो होए तो झेले,
सतावत बांसुरी बारह मासी,
सोने की होती तो का गति होती,
भई गल फांसी जे बाँस की बांसी ॥
कानन कानन बाजी रही अरु,
कानन कानन देत सुनाई,
कान ना मानत पीर ना जानत,
का करे कान करे अब माई,
हरि अधरमृत पान करे,
हरि अधरमृत पान करे,
अभिमान करे देखो बांस की जाइ,
प्राण सबे के धरे अधरान,
हरी जब ते अधरान धराई ॥
चोर भयो नवनीत के ले अरु,
प्रीत के ले बदनाम भयो री,
राधिका रानी के दूधिया रंग ते,
रंग मिलायो तो श्याम भयो री,
काम कलानिधि कृष्ण की कांति के,
काम कलानिधि कृष्ण की कांति के,
कारन काम अकाम भयो री,
प्रथमाकर बनवारी को ले,
रजखण्ड सखी ब्रजधाम भयो री ॥
बाँके बिहारी की बाँसुरी बाँकी,
पे सुदो करेजा में घाव करे री,
मोहन तान ते होए लगाव तो,
औरन ते अलगाव करे री ॥
बाँके बिहारी की बाँसुरी बाँकी – Banke Bihari Ki Bansuri Banki Bhajan
