जब भी जी चाहे – Jab Bhi Jee Chahe, Lata Mangeshkar, Daag
“Jab Bhi Jee Chahe” एक विशुद्ध साहित्यिक और संगीतात्मक अनुभव है न कोई शोर, न कोई सजावट, सिर्फ गहराई और आत्मा की आवाज़। लता मंगेशकर की अमर गायकी, साहिर साहब के बेमिसाल बोल और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के मर्मस्पर्शी संगीत से सजा यह गीत सिनेमा और कविता के बीच की एक पुल की तरह है।

जब भी जी चाहे – Jab Bhi Jee Chahe Song Credits
- Movie/Album: दाग (1973)
- Music : लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
- Lyrics : साहिर लुधियानवी
- Singer : लता मंगेशकर
जब भी जी चाहे – Jab Bhi Jee Chahe Song Lyrics in hindi
जब भी जी चाहे, नई दुनिया बसा लेते हैं लोग
एक चेहरे पे कई चेहरे, लगा लेते हैं लोग
जब भी जी चाहे…
याद रहता है किसे गुज़रे ज़माने का चलन
सर्द पड़ जाती है चाहत, हार जाती है लगन
अब मुहब्बत भी है क्या, इक तिजारत के सिवा
हम ही नादाँ थे जो ओढ़ा बीती यादों का कफ़न
वर्ना जीने के लिए सब कुछ भुला लेते हैं लोग
एक चेहरे पे कई…
जाने वो क्या लोग थे, जिनको वफ़ा का पास था
दूसरे के दिल पे क्या गुज़रेगी ये एहसास था
अब हैं पत्थर के सनम, जिनको एहसास ना ग़म
वो ज़माना अब कहाँ, जो अहल-ए-दिल को रास था
अब तो मतलब के लिए नाम-ए-वफ़ा लेते हैं लोग
जब भी जी चाहे…
