जाने कहाँ गयी – Jaane Kahan Gayi, Md.Rafi, Dil Apna Aur Preet Parai
“Jaane Kahan Gayi” केवल एक गीत नहीं है, यह एक खोए हुए प्रेम की पुकार है। यह गीत उन सभी दिलों की आवाज़ है जो कभी किसी को खो चुके हैं, या किसी के जाने के बाद अधूरे रह गए हैं। मोहम्मद रफ़ी, शैलेन्द्र और शंकर-जयकिशन की यह रचना एक संगीतमय वेदना है, जो हर सुनने वाले को उसकी अपनी यादों में ले जाती है।

जाने कहाँ गयी – Jaane Kahan Gayi Song Credits
Movie/Album: दिल अपना और प्रीत पराई (1960)
Music : शंकर जयकिशन
Lyrics : शैलेन्द्र
Singer : मो.रफ़ी
जाने कहाँ गयी – Jaane Kahan Gayi Song Lyrics in Hindi
जाने कहाँ गई, जाने कहाँ गई
दिल मेरा ले गई, ले गई वो
जाने कहाँ गई…
देखते-देखते क्या से क्या हो गया
धड़कनें रह गईं, दिल जुदा हो गया
जाने कहाँ गई…
आज टूटा हुआ दिल का ये साज़ है
अब वो नग्में कहाँ सिर्फ़ आवाज़ है
जाने कहाँ गई…
घूटता रहता ना दम, जान तो छूटती
काश कहता कोई, वो मोहब्बत न थी
जाने कहाँ गई…
हाल क्या है मेरा, आ के खुद देख जा
अब तेरे हाथ है जीना-मरना मेरा
जाने कहाँ गई…
