हर एक घर में दीया – Har Ek Ghar Mein Diya, Jagjit Singh, Dhoop.
“Har Ek Ghar Mein Diya” एक ऐसा गीत है जो शांति, करुणा और उजाले की बात करता है वह उजाला जो सिर्फ बिजली से नहीं, इंसानियत, सहानुभूति और समर्पण से आता है। जगजीत सिंह की आवाज़, ललित सेन का संयत संगीत और निदा फ़ाज़ली के शब्द तीनों मिलकर इस गीत को आत्मा का दीपक बना देते हैं।

हर एक घर में दीया – Har Ek Ghar Mein Diya Song Credits
- Movie/Album: धूप (2003)
- Music : ललित सेन
- Lyrics : निदा फ़ाज़ली
- Singer : जगजीत सिंह
हर एक घर में दीया – Har Ek Ghar Mein Diya Song Lyrics in Hindi
हर एक घर में दीया भी जले, अनाज भी हो
अगर ना हो कहीं ऐसा तो एहतजाज भी हो
हर एक घर में..
हुकूमतों को बदलना तो कुछ मुहाल नहीं
हुकूमतें जो बदलता है वो समाज भी हो
अगर ना हो कहीं ऐसा तो एहतजाज भी हो
हर एक घर में…
रहेगी कब तलक वादों में कैद खुशहाली
हर एक बार ही कल क्यों, कभी तो आज भी हो
अगर ना हो कहीं ऐसा तो एहतजाज भी हो
हर एक घर में…
ना करते शोर शराबा तो और क्या करते
तुम्हारे शहर में कुछ और काम-काज भी हो
अगर ना हो कहीं ऐसा तो एहतजाज भी हो
हर एक घर में…
