धरती कहे पुकार के – Dharti Kahe Pukar Ke, Lata Mangeshkar, Manna Dey, Do Bigha Zamin
“Dharti Kahe Pukar Ke” फ़िल्म दो बीघा ज़मीन का एक बेहद भावनात्मक, प्रेरणादायक और जनमानस को झकझोर देने वाला गीत है। यह गीत किसानों की पीड़ा, मेहनत, उम्मीद और संघर्ष को एक मार्मिक रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें न केवल व्यक्तिगत वेदना है, बल्कि सामाजिक चेतना भी है। यह गीत भारतीय सिनेमा में किसान वर्ग की दुर्दशा और उनके संघर्ष की आवाज़ बनकर उभरा।

धरती कहे पुकार के – Dharti Kahe Pukar Ke Song Credits
- Movie/Album: दो बीघा ज़मीन (1953)
- Music : सलिल चौधरी
- Lyrics : शैलेन्द्र
- Singers : लता मंगेशकर, मन्ना डे
धरती कहे पुकार के – Dharti Kahe Pukar Ke Song Lyrics in Hindi
भाई रे
गंगा और जमुना की तू गहरी है धार
आगे या पीछे, सबको जाना है पार
धरती कहे पुकार के, बीज बिछा ले प्यार के
मौसम बीता जाए, मौसम बीता जाए
मौसम बीता जाए…
अपनी कहानी छोड़ जा, कुछ तो निशानी छोड़ जा
कौन कहे इत ओर तू फिर आए न आए
मौसम बीता जाए…
तेरी राह में कलियों ने नैना बिछाए
डाली-डाली कोयल काली
तेरे गीत गाए, तेरे गीत गाए
अपनी कहानी छोड़ जा…
हो भाई रे…
नीला अम्बर मुस्काए, हर साँस तराने गाए
हाय तेरा दिल क्यूँ मुरझाए
मन की बंसी पे तू भी कोई धुन बजा ले भाई
तू भी मुस्कुरा ले
अपनी कहानी छोड़ जा…
