बच्चे मन के सच्चे – Bachche Man Ke Sachche, Lata Mangeshkar, Do Kaliyan
“Bachche Man Ke Sachche” फ़िल्म दो कलियाँ का एक अत्यंत भावनात्मक, मासूमियत से भरा और समाज को आइना दिखाने वाला गीत है। यह गीत बच्चों की सरलता, निष्कपटता और सच्चाई को केंद्र में रखकर उन वयस्कों को सवाल करता है जो छल, भेदभाव और नफरत को जीते हैं। यह गीत आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उस दौर में था, जब यह बना था।

बच्चे मन के सच्चे – Bachche Man Ke Sachche Song Credits
Movie/Album: दो कलियाँ (1968)
Music : रवि
Lyrics : साहिर लुधियानवी
Singer : लता मंगेशकर
बच्चे मन के सच्चे – Bachche Man Ke Sachche Song Lyrics in Hindi
बच्चे मन के सच्चे
सारे जग की आँख के तारे
ये वो नन्हें फूल हैं जो
भगवान को लगते प्यारे
बच्चे मन के सच्चे…
खुद रूठे, खुद मन जायें
फिर हमजोली बन जायें
झगड़ा जिसके साथ करे
अगले ही पल फिर बात करे
इनको किसी से बैर नहीं
इनके लिए कोई ग़ैर नहीं
इनका भोलापन मिलता है
सबको बाँह पसारे
बच्चे मन के सच्चे…
इन्साँ जब तक बच्चा है
तब तक समझो सच्चा है
ज्यूँ-ज्यूँ उसकी उमर बढ़े
मन पर झूठ का मैल चढ़े
क्रोध बढ़े, नफ़रत घेरे
लालच की आदत घेरे
बचपन इन पापों से हटकर
अपनी उमर गुज़ारे
बच्चे मन के सच्चे…
तन कोमल, मन सुन्दर है
बच्चे बड़ों से बेहतर हैं
इनमें छूत और छात नहीं
झूठी ज़ात और पात नहीं
भाषा की तकरार नहीं
मज़हब की दीवार नहीं
इनकी नज़रों में एक है
मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे
बच्चे मन के सच्चे…
बच्चे मन के सच्चे – Bachche Man Ke Sachche Song
https://youtu.be/CQuBmwOUFpU?feature=shared
