Shaam-e-Gham Ki Kasam

शाम-ए-ग़म की कसम – Shaam-e-Gham Ki Kasam, Talat Mahmood, Footpath

“Shaam-e-Gham Ki Kasam” एक कालजयी गीत है, जो आज भी सुनने वालों के दिल में वही पीड़ा और सौंदर्य भर देता है जैसे पहली बार सुना हो। तलत महमूद की दर्दभरी आवाज़, खैय्याम का सूफियाना संगीत और मजरूह सुल्तानपुरी की भावनाओं से भरी शायरी, इन तीनों की जुगलबंदी ने इस गीत को अमर बना दिया है।

शाम-ए-ग़म की कसम
Shaam-e-Gham Ki Kasam

शाम-ए-ग़म की कसम – Shaam-e-Gham Ki Kasam Song Credits

  • Movie/Album: फुटपाथ (1953)
  • Music By: खय्याम
  • Lyrics : मजरूह सुल्तानपुरी
  • Singer : तलत महमूद

शाम-ए-ग़म की कसम – Shaam-e-Gham Ki Kasam Song Lyrics in Hindi

शाम-ए-ग़म की कसम
आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा, आ भी जा, आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की कसम

दिल परेशान है, रात वीरान है
देख जा, किस तरह आज तन्हाँ हैं हम
शाम-ए-ग़म की कसम

चैन कैसा जो पहलू में तू ही नहीं
मार डाले न दर्द-ए-जुदाई कहीं
रुत हसीं  है तो क्या, चांदनी है तो क्या
चांदनी ज़ुल्म है और जुदाई सितम
शाम-ए-ग़म की कसम…

अब तो आजा के अब रात भी सो गई
ज़िन्दगी ग़म के सहराओं में खो गई
ढूंढती है नज़र, तू कहाँ है मगर
देखते देखते आया आँखों में दम
शाम-ए-ग़म की कसम…

शाम-ए-ग़म की कसम – Shaam-e-Gham Ki Kasam Song

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top