एक अकेला इस शहर में – Ek Akela Is Sheher Mein, Bhupinder Singh, Gharonda
“Ek Akela Is Sheher Mein” सिर्फ एक गीत नहीं, यह एक एहसास है, उस हर व्यक्ति की आवाज़, जो किसी भी महानगर की चकाचौंध के पीछे छिपे सन्नाटे को महसूस करता है। भूपिंदर सिंह की सधी हुई आवाज़, जयदेव का सूफियाना संगीत और गुलज़ार की सादगी से गूंथे शब्द, ये तीनों इस गीत को कालजयी बना देते हैं।

एक अकेला इस शहर में – Ek Akela Is Sheher Mein Song Credits
- Movie/Album: घरोंदा (1977)
- Music By: जयदेव
- Lyrics : गुलज़ार
- Singer : भूपिंदर सिंह
एक अकेला इस शहर में – Ek Akela Is Sheher Mein Song Lyrics in Hindi
एक अकेला इस शहर में
रात में और दोपहर में
आब-ओ-दाना ढूँढता है
आशियाना ढूँढता है
एक अकेला इस शहर में…
दिन खाली-खाली बर्तन है
और रात है जैसे अँधा कुआँ
इन सूनी अँधेरी आँखों में
आँसू की जगह आता हैं धुआँ
जीने की वजह तो कोई नहीं
मरने का बहाना ढूँढता है
एक अकेला इस शहर में…
इन उम्र से लम्बी सड़कों को
मंज़िल पे पहुँचते देखा नहीं
बस दौड़ती फिरती रहती हैं
हमने तो ठहरते देखा नहीं
इस अजनबी से शहर में
जाना पहचाना ढूँढता है
एक अकेला इस शहर में…
