दो दीवाने शहर में – Do Deewane Sheher Mein, Bhupinder Singh, Runa Laila, Gharaonda
“Do Deewane Sheher Mein” फ़िल्म घरौंदा का एक अत्यंत सजीव, संवेदनशील और यथार्थवादी प्रेम गीत है। यह गीत केवल रोमांस की बात नहीं करता, बल्कि एक संघर्षशील जोड़े के सपनों, उनकी उम्मीदों और रिश्ते की परतों को भी दर्शाता है। यह गीत 1970 के दशक के मुंबई जैसे महानगर में प्यार करने वालों की आशाओं और असलियत का आईना है।

दो दीवाने शहर में – Do Deewane Sheher Mein Song Credits
- Movie/Album: घरौंदा (1977)
- Music By: जयदेव
- Lyrics : गुलज़ार
- Singers : भूपिंदर सिंह, रुना लैला
दो दीवाने शहर में – Do Deewane Sheher Mein Song Lyrics in Hindi
दो दीवाने शहर में
रात में और दोपहर में
आब-ओ-दाना ढूँढते हैं
इक आशियाना ढूँढते हैं
इन भूल-भुलइया गलियों में, अपना भी कोई घर होगा
अम्बर पे खुलेगी खिड़की या, खिड़की पे खुला अम्बर होगा
असमानी रंग की आँखों में
असमानी या आसमानी?
असमानी रंग की आँखों में
बसने का बहाना ढूंढते हैं, ढूंढते हैं
आबोदाना ढूंढते हैं…
दो दीवाने शहर में…
जब तारे ज़मीं पर
तारे, और ज़मीं पर?
Of Course!
जब तारे ज़मीं पर चलते हैं
आकाश ज़मीं हो जाता है
उस रात नहीं फिर घर जाता, वो चांद यहीं सो जाता है
जब तारे ज़मीं पर चलते हैं
आकाश ज़मीं हो जाता है
उस रात नहीं फिर घर जाता, वो चांद यहीं सो जाता है
पल भर के लिये इन आँखों में हम एक ज़माना ढूंढते हैं, ढूंढते हैं
आबोदाना ढूंढते हैं…
दो दीवाने शहर में…
