नूर-ए-खुदा – Noor-E-Khuda -Shankar, Adnan & Shreya
परिचय
“माई नेम इज़ खान” फिल्म का “नूर-ए-खुदा” गीत सिर्फ एक गीत नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक और भावनात्मक अनुभव है। इस लेख में, हम इस गीत के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करेंगे और इसके सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को समझने का प्रयास करेंगे।
“माई नेम इज़ खान” एक बॉलीवुड फिल्म है, जो करण जौहर द्वारा निर्देशित है और इसमें शाहरुख खान और काजोल मुख्य भूमिका में हैं। यह फिल्म एक आत्मकथात्मक ड्रामा है जो समाज में धर्म और पहचान के मुद्दों को संबोधित करती है।

नूर-ए-खुदा – Noor-E-Khuda Song Details
- Movie/Album: माई नेम इज़ खान
- Year : 2010
- Music By: शंकर, एहसान, लॉय
- Lyrics By: निरंजन येंगर
- Performed By: शंकर महादेवन, अदनान सामी, श्रेया घोषाल
नूर-ए-खुदा – Noor-E-Khuda Lyrics in Hindi
नूर-ए-खुदा…
अजनबी मोड़ है, खौफ हर ओर है
हर नज़र पे धुआं छा गया
पल भर में जाने क्या खो गया
आसमां ज़र्द है, आहें भी सर्द है
तन से साया जुदा हो गया
पल भर में जाने क्या खो गया
सांस रुक सी गयी, जिस्म छिल सा गया
टूटे ख़्वाबों के मंज़र पे तेरा जहां चल दिया
नूर-ए-खुदा, नूर-ए-खुदा
तू कहाँ छुपा है हमें ये बता
नूर-ए-खुदा, नूर-ए-खुदा
यूँ ना हमसे नज़रें फिरा
नज़रें करम फरमा ही दे
दीन-ओ-धरम को जगा ही दे
जलती हुई तन्हाईयाँ, रूठी हुई परछाईयाँ
कैसे उड़ी ये हवा, छाया ये कैसा समां
रूह जम सी गयी, वक़्त थम सा गया
टूटे ख़्वाबों के…
उजड़े से लम्हों को आस तेरी
ज़ख़्मी दिलों को है प्यास तेरी
हर धड़कन को तलाश तेरी
तेरा मिलता नहीं है पता
खाली आँखें खुद से सवाल करे
अमनों की चीख बेहाल करे
बहता लहू फ़रियाद करे
तेरा मिटता चला है निशाँ
रूह जम सी गयी
वक़्त थम सा गया
टूटे ख़्वाबों के…
