बच्चे मन के सच्चे – Bachche Man Ke Sachche – Lata Mangeshkar
“बच्चे मन के सच्चे” गाना 1968 में रिलीज़ हुई फिल्म “दो कलियाँ” का एक प्रसिद्ध गीत है। इस गाने को मोहम्मद रफ़ी और सुमन कल्याणपुर ने गाया है और इसके बोल आनंद बक्शी ने लिखे हैं। संगीतकार रवि ने इस गाने का संगीत तैयार किया है। यह गाना बच्चों की मासूमियत और उनकी सच्चाई को दर्शाता है।
फिल्म “दो कलियाँ” में मुख्य भूमिका में माला सिन्हा और बिस्वजीत हैं। यह गाना फिल्म में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आता है और इसकी धुन और बोल दोनों ही दर्शकों के दिलों को छू जाते हैं।

बच्चे मन के सच्चे – Bachche Man Ke Sachche Song Details
- Movie/Album: दो कलियाँ
- Year : 1968
- Music By: रवि
- Lyrics By: साहिर लुधियानवी
- Performed By: लता मंगेशकर
बच्चे मन के सच्चे – Bachche Man Ke Sachche Lyrics in Hindi
बच्चे मन के सच्चे
सारे जग की आँख के तारे
ये वो नन्हें फूल हैं जो
भगवान को लगते प्यारे
बच्चे मन के सच्चे…
खुद रूठे, खुद मन जायें
फिर हमजोली बन जायें
झगड़ा जिसके साथ करे
अगले ही पल फिर बात करे
इनको किसी से बैर नहीं
इनके लिए कोई ग़ैर नहीं
इनका भोलापन मिलता है
सबको बाँह पसारे
बच्चे मन के सच्चे…
इन्साँ जब तक बच्चा है
तब तक समझो सच्चा है
ज्यूँ-ज्यूँ उसकी उमर बढ़े
मन पर झूठ का मैल चढ़े
क्रोध बढ़े, नफ़रत घेरे
लालच की आदत घेरे
बचपन इन पापों से हटकर
अपनी उमर गुज़ारे
बच्चे मन के सच्चे…
तन कोमल, मन सुन्दर है
बच्चे बड़ों से बेहतर हैं
इनमें छूत और छात नहीं
झूठी ज़ात और पात नहीं
भाषा की तकरार नहीं
मज़हब की दीवार नहीं
इनकी नज़रों में एक है
मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे
बच्चे मन के सच्चे…
