शंकर का डमरू बाजे रे – Shankar Ka Damru Baje Re, Mamta
“Shankar Ka Damru” भजन, जिसे ममता जी ने अपनी भक्ति-भाव से भरी आवाज़ में प्रस्तुत किया है, शिवभक्तों के लिए प्रेरणा और ऊर्जा का स्रोत है। इसमें संगीत, श्रद्धा और अध्यात्म का सुंदर संगम है, जो हर भक्त को शिव की महिमा का अनुभव कराता है।

शंकर का डमरू बाजे रे – Shankar Ka Damru Baje Re Bhajan Credits
- Song: shankar ka damroo
- Singer: Mamta
- Lyrics: suprasidh bhajan lekhak evam sankirtan acharya, guruji Sh. Kewal Krishan Madhupji (Madhup Hari Maharaj),
- music : Sahil
- Video : Sahil
शंकर का डमरू बाजे रे – Shankar Ka Damru Baje Re Bhajan in Hindi
शंकर का डमरू बाजे रे,
कैलाशपति शिव नाचे रे ॥
जटाजूट में नाचे गंगा,
शिव मस्तक पर नाथे चंदा,
नाचे वासुकी नीलकंठ पर,
नागेश्वर गल साजे रे,
शंकर का डमरू बाजे रे,
कैलाशपति शिव नाचे रे ॥
सीस मुकुट सोहे अति सुंदर,
नाच रहे कानन में कुंडल,
कंगन नूपुर चर्म-ओढ़नी,
भस्म दिगम्बर राजे रे,
शंकर का डमरू बाजे रे,
कैलाशपति शिव नाचे रे ॥
कर त्रिशूल कमंडल साजे,
धनुष-बाण कंधे पै नाचे,
बजे ‘मधुप’ मृदंग ढोल डफ,
शंख नगारा बाजे रे,
शंकर का डमरू बाजे रे,
कैलाशपति शिव नाचे रे ॥
तीनलौक डमरू जब बाजे,
डम डम डम डम की ध्यनि गाजे,
ब्रह्म नाचे, विष्णु नाचे,
अनहद का स्वर गाजे रे,
शंकर का डमरू बाजे रे,
कैलाशपति शिव नाचे रे ॥
