श्री भगवद्‍ गीता आरती

श्री भगवद्‍ गीता आरती Aarti Shri Bhagwat Geeta

श्री भगवद् गीता आरती एक प्रार्थना है जो भगवद् गीता की महिमा और महत्व को स्तुति और आदर से व्यक्त करती है। इस आरती में भगवद् गीता के महानतम श्लोकों का स्मरण किया जाता है और भगवान की प्रार्थना की जाती है कि वह अपने भक्तों को सदैव मार्गदर्शन करें।

श्री भगवद् गीता आरती को गाकर भगवद् गीता के श्लोकों के माध्यम से भक्त आध्यात्मिक उन्नति और शांति की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। यह आरती भगवद् गीता के महत्वपूर्ण अंशों को संजीवनी देती है और भक्तों को धर्म के मार्ग पर स्थिरता और प्रेरणा प्रदान करती है।

श्री भगवद्‍ गीता आरती
श्री भगवद्‍ गीता आरती

श्री भगवद्‍ गीता आरती Details

  • Bhajan: Aarti Shrimadbhagwad Geeta
  • Singer: Anuradha Paudwal
  • Music Director: Shekhar Sen
  • Lyrics: Traditional
  • Album: Shrimad Bhagwad Geeta Part-1, 2, 3 & 4
  • Music Label: T-Series

श्री भगवद्‍ गीता आरती Lyrics in Hindi

जय भगवद् गीते,
जय भगवद् गीते ।
हरि-हिय-कमल-विहारिणि,
सुन्दर सुपुनीते ॥

कर्म-सुमर्म-प्रकाशिनि,
कामासक्तिहरा ।
तत्त्वज्ञान-विकाशिनि,
विद्या ब्रह्म परा ॥
जय भगवद् गीते…॥

निश्चल-भक्ति-विधायिनि,
निर्मल मलहारी ।
शरण-सहस्य-प्रदायिनि,
सब विधि सुखकारी ॥
जय भगवद् गीते…॥

राग-द्वेष-विदारिणि,
कारिणि मोद सदा ।
भव-भय-हारिणि,
तारिणि परमानन्दप्रदा ॥
जय भगवद् गीते…॥

आसुर-भाव-विनाशिनि,
नाशिनि तम रजनी ।
दैवी सद् गुणदायिनि,
हरि-रसिका सजनी ॥
जय भगवद् गीते…॥

समता, त्याग सिखावनि,
हरि-मुख की बानी ।
सकल शास्त्र की स्वामिनी,
श्रुतियों की रानी ॥
जय भगवद् गीते…॥

दया-सुधा बरसावनि,
मातु! कृपा कीजै ।
हरिपद-प्रेम दान कर,
अपनो कर लीजै ॥
जय भगवद् गीते…॥

जय भगवद् गीते,
जय भगवद् गीते ।
हरि-हिय-कमल-विहारिणि,
सुन्दर सुपुनीते ॥

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