आँखों की गुस्ताखियाँ – Aankhon Ki Gustakhiyaan, Kumar Sanu, Kavita Krishnamurthy
Aankhon Ki Gustakhiyaan यह गीत प्रेम की मासूमियत, नज़रों की शरारत और दिल में जन्म ले रहे एहसासों को बेहद खूबसूरती से व्यक्त करता है। इस्माईल दरबार ने अपने दिलकश और मधुर संगीत से इसे एक जादुई रोमांटिक माहौल दिया है। महबूब के बोल प्यार में होने वाली अनकही बातों, नज़रों के इशारों और दिल की हलचल को बहुत ही मुलायम अंदाज़ में बयान करते हैं।

आँखों की गुस्ताखियाँ – Aankhon Ki Gustakhiyaan Song Credits
- Movie/Album: हम दिल दे चुके सनम (1999)
- Music : इस्माईल दरबार
- Lyrics : महबूब
- Singers : कुमार सानू, कविता कृष्णमूर्ति
आँखों की गुस्ताखियाँ – Aankhon Ki Gustakhiyaan Song Lyrics in Hindi
आँखों की गुस्ताखियाँ माफ हो
इक टुक तुम्हें देखती है
जो बात कहना चाहे ज़ुबां
तुमसे ये वो कहती है
आँखों की शर्मा-ओ-हया माफ हो
तुम्हें देख के छुपती है
उठी आँखे जो बात ना कह सकीं
झुकी आँखें वो कहती है
काजल का एक तिल तुम्हारे लबों पे लगा दूँ
चंदा और सूरज की नज़रों से तुमको बचा लूँ
पलकों की चिलमन में आओ मैं तुमको छुपा लूँ
ख़यालों की ये शोखियाँ माफ हो
हरदम तुम्हें सोचती है
जब होश में होता है जहां
मदहोश ये करती है
आँखों की गुस्ताखियाँ…
ये ज़िन्दगी आपकी ही अमानत रहेगी
दिल में सदा आपकी ही मोहब्बत रहेगी
इन साँसों को आपकी ही ज़रूरत रहेगी
इस दिल की नादानियाँ माफ हो
ये मेरी कहा सुनती हैं
ये पलपल जो होती है बेकल सनम
तो सपने नये बुनती हैं
आँखों की गुस्ताखियाँ…
