आप भी आइये हमको भी बुलाते रहिये – Aap Bhi Aaiye
Humko Bhi Bulaate Rahiye, Jagjit Singh, Soz
“Aap Bhi Aaiye Humko Bhi Bulaate Rahiye” सिर्फ़ एक ग़ज़ल नहीं, एक रिश्ता है — जो शब्दों के ज़रिए हर सुनने वाले से जुड़ता है। यह ग़ज़ल उस नरम रिश्ते की याद दिलाती है जहाँ दूरियाँ ज़रूरी नहीं होतीं, पर याद दिलाते रहना बेहद ज़रूरी हो जाता है।

आप भी आइये हमको भी बुलाते रहिये – Aap Bhi Aaiye Humko Bhi Bulaate Rahiye
Movie/Album: सोज़ (2001)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: जावेद अख्तर
Performed By: जगजीत सिंह
आप भी आइये हमको भी बुलाते रहिये – Aap Bhi Aaiye Humko Bhi Bulaate Rahiye
आप भी आइये हमको भी बुलाते रहिये
दोस्ती जुर्म नहीं दोस्त बनाते रहिये
आप भी आइये हमको…
ज़हर पी जाइये और बाँटिये अमृत सब को
ज़ख्म भी खाइये और गीत भी गाते रहिये
आप भी आइये हमको…
वक़्त ने लूट लीं लोगों की तमन्नाएँ भी
ख़्वाब जो देखिये औरों को दिखाते रहिये
दोस्ती जुर्म नहीं दोस्त…
शक्ल तो आपके भी ज़हन में होगी कोई
कभी बन जाएगी तस्वीर बनाते रहिये
आप भी आइये हमको…
