अब के बरसात की रुत – Ab Ke Barsaat Ki Rut, Chitra Singh, Someone Somewhere
“Ab Ke Barsaat Ki Rut” एक ऐसी ग़ज़ल है जो तन्हाई, याद और मौसम के मिलन से दिल की गहराईयों तक उतर जाती है। चित्रा सिंह की भावुक गायकी और मुज़फ़्फ़र वारसी की कोमल शायरी इसे एक कालजयी रचना बना देती है। यह ग़ज़ल उन सभी के लिए है जो कभी किसी को बेइंतहा चाहकर भी खो चुके हैं।

अब के बरसात की रुत – Ab Ke Barsaat Ki Rut Ghazal Credits
- Movie/Album: समवन समवेयर (1990)
- Music : जगजीत सिंह
- Lyrics : मुज़फ़्फ़र वारसी
- Singer : चित्रा सिंह
अब के बरसात की रुत – Ab Ke Barsaat Ki Rut Ghazal Lyrics in Hindi
अब के बरसात की रुत और भी भड़कीली है
जिस्म से आग निकलती है, क़बा गीली है
अब के बरसात की…
सोचता हूँ के अब अंजाम-ए-सफ़र क्या होगा
लोग भी काँच के हैं, राह भी पथरीली है
अब के बरसात की…
पहले रग-रग से मेरी ख़ून निचोड़ा उसने
अब ये कहता है के रंगत ही मेरी पीली है
अब के बरसात की…
मुझ को बे-रंग ही कर दे न कहीं रंग इतने
सब्ज़ मौसम है, हवा सुर्ख़, फ़िज़ा नीली है
अब के बरसात की…
