हाथों में अपने – Haathon Mein Apne – Hariharan
‘Haathon Mein Apne’ ग़ज़ल हरिहरन की मधुर आवाज़ और इब्राहिम अश्क़ की बेहतरीन शायरी का एक दिलकश उदाहरण है। इस ग़ज़ल का संगीत जॉली मुखर्जी और किशोर शर्मा द्वारा तैयार किया गया है, जिसने शायरी के भावों को और भी गहराई दी है। ग़ज़ल की खूबसूरत धुन और मखमली आवाज़ के साथ इब्राहिम अश्क़ के शायराना बोल इसे श्रोताओं के दिलों में एक गहरी छाप छोड़ते हैं।
Haathon Mein Apne
हाथों में अपने – Haathon Mein Apne Song Deatils…
- Movie/Album: ग़ज़ल
- Year : 1989
- Music By: जॉली मुखर्जी, किशोर शर्मा
- Lyrics By: इब्राहिम अश्क़
- Performed By: हरिहरन
हाथों में अपने – Haathon Mein Apne Lyrics in hindi
महफ़िल-ए-यारा में
दीवानों का आलम कुछ न पूछ
जाम हाथों में उठाए तो छलकना चाहिए
हाथों में अपने जाम नहीं है तो कुछ नहीं
हर शाम उसके नाम नहीं है तो कुछ नहीं
हाथों में अपने जाम…
मय-ख़ाना हो, शराब हो, साक़ी हो, और हम
पीने का इंतज़ाम नहीं है तो कुछ नहीं
हर शाम उसके नाम…
दुनिया बहुत हसीन है, मंज़ूर है मगर
लेकिन शराब आम नहीं है तो कुछ नहीं
हर शाम उसके नाम…
पीते नहीं हैं ‘अश्क़’ कभी मुफ़्त की शराब
वो चीज़ जिसका दाम नहीं है तो कुछ नहीं
हर शाम उसके नाम…
हाथों में अपने – Haathon Mein Apne Video Song…

