कहीं पे निगाहें – Kahin Pe Nigahein – Shamshad Begum
“Kahin Pe Nigahein” फिल्म सी.आई.डी. का एक बेहद प्रसिद्ध और मजेदार गीत है, जो अपने अनोखे अंदाज और मस्ती भरे बोलों के लिए जाना जाता है। यह गाना दर्शकों को अपने सस्पेंस और नटखटपन के साथ बांध कर रखता है और आज भी श्रोताओं के बीच उतना ही लोकप्रिय है।

कहीं पे निगाहें – Kahin Pe Nigahein Song Credits
- Movie/Album: सी.आई.डी. (1956)
- Music By: ओ.पी.नैय्यर
- Lyrics By: मजरूह सुल्तानपुरी
- Singer : शमशाद बेगम
कहीं पे निगाहें – Kahin Pe Nigahein Lyrics in Hindi
कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना
जीने दो ज़ालिम, बनाओ न दीवाना
कहीं पे निगाहें…
कोई न जाने इरादे हैं किधर के
मार न देना तीर नज़र का किसी के जिगर पे
नाज़ुक ये दिल है, बचाना ओ बचाना
कहीं पे निगाहें…
तौबा जी तौबा निगाहों का मचलना
देख-भाल के ऐ दिलवालों पहलू बदलना
क़ाफ़िर अदा की, अदा है मस्ताना
कहीं पे निगाहें…
ज़ख़्मी हैं तेरे, जायें तो कहाँ जायें
तेरे तीर के मारे हुए देते हैं सदायें
कर दो जी घायल, तुम्हारा है ज़माना
कहीं पे निगाहें…
आया शिकारी, ओ पंछी तू सम्भल जा
देख जाल है ज़ुल्फ़ों का, तू चुपके से निकल जा
उड़ जा ओ पंछी, शिकारी है दीवाना
कहीं पे निगाहें…
