किसी को दे के दिल – Kisi Ko De Ke Dil – Chitra Singh, Ghulam Ali
“Kisi Ko De Ke Dil” एक बेहद खूबसूरत और शायरी से सजा गीत है, जिसे मशहूर गायिका चित्रा सिंह ने अपनी सुरीली आवाज़ में प्रस्तुत किया है। यह गीत महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी पर आधारित है, और इसका संगीत जगजीत सिंह ने तैयार किया है। इस गीत में ग़ालिब की शायरी की गहराई और जगजीत सिंह के संगीत की मिठास का अद्भुत संगम है। यह गीत ग़ालिब की शायरी के उन भावनात्मक पहलुओं को छूता है जो प्रेम, दर्द, और ज़िंदगी के अनुभवों को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करते हैं।
Kisi Ko De Ke Dil
किसी को दे के दिल – Kisi Ko De Ke Dil Song Details
Movie/Album: मिर्ज़ा ग़ालिब (टी वी सीरियल) (1988), ग़ालिबनामा (2012)
Music By: जगजीत सिंह, गुलाम अली
Lyrics By: मिर्ज़ा ग़ालिब
Performed By: चित्रा सिंह, गुलाम अली
किसी को दे के दिल – Kisi Ko De Ke Dil Lyrics in Hindi
चित्रा सिंह
किसी को दे के दिल कोई
नवा संज-ए-फ़ुग़ाँ क्यूँ हो
न हो जब दिल ही सीने में
तो फिर मुँह में ज़ुबाँ क्यूँ हो
वफ़ा कैसी, कहाँ का इश्क़
जब सर फोड़ना ठहरा
तो फिर, ऐ संग-दिल
तेरा ही संग-ए-आस्ताँ क्यूँ हो
यही है आज़माना, तो
सताना किसको कहते हैं
अदू के हो लिये जब तुम
तो मेरा इम्तिहाँ क्यूँ हो
क़फ़स में, मुझसे रूदाद-ए-चमन
कहते न डर, हमदम
गिरी है जिसपे कल बिजली
वो मेरा आशियाँ क्यूँ हो
