ॐ जय जगदीश हरे – Om Jai Jagadish Hare भगवान विष्णु की आरती
भगवान विष्णु की आरती
Om Jai Jagadish Hare भगवान विष्णु की आरती का पाठ करने से कई लाभ होते हैं। यहाँ कुछ मुख्य फायदे हैं:
- आत्मिक और मानसिक शांति: भगवान विष्णु की आरती का पाठ करने से मन और आत्मा में शांति का अनुभव होता है। आरती के मंत्रों का जाप करने से मन की चंचलता कम होती है और आत्मा को आनंद का अनुभव होता है।
- आध्यात्मिक विकास: भगवान विष्णु की आरती का पाठ करने से व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास होता है। इससे भक्त की आत्मा में शुद्धि और सात्त्विकता का विकास होता है।
- कल्याण और समृद्धि का अनुभव: भगवान विष्णु की आरती का पाठ करने से भक्त को कल्याण और समृद्धि का अनुभव होता है। माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा से उनका जीवन समृद्धि से भरा रहता है।
- आपत्ति और विघ्नों का निवारण: भगवान विष्णु की आरती का पाठ करने से आपत्तियों और विघ्नों का निवारण होता है। भक्त का जीवन सुरक्षित और समृद्ध होता है और उन्हें सभी कठिनाइयों से निकालने की शक्ति मिलती है।
- आत्मविश्वास और सहायता: भगवान विष्णु की आरती का पाठ करने से भक्त का आत्मविश्वास और सहायता मिलती है। वे अपने कार्यों में सफल होते हैं और जीवन के हर क्षेत्र में समृद्धि की ओर अग्रसर होते हैं।
- कर्मों की सिद्धि: भगवान विष्णु की आरती का पाठ करने से भक्त के कर्मों की सिद्धि होती है। उनके सारे कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न होते हैं और उन्हें प्रसन्नता मिलती है।

ॐ जय जगदीश हरे – Om Jai Jagadish Hare Song Credits
- Song Title: Om Jai Jagadish Hare
- Singers : Sneha Pant, Udit Narayan
- Music lables : T-Series
ॐ जय जगदीश हरे – Om Jai Jagadish Hare Lyrics in Hindi
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट दास जनों के संकट क्षण में दूर करे
ॐ जय जगदीश हरे……….
जो ध्यावे फल पावे दुःखबिन से मन का स्वामी दुःखबिन से मन का
सुख सम्पति घर आवे सुख सम्पति घर आवे कष्ट मिटे तन का
ॐ जय जगदीश हरे……
मात पिता तुम मेरे शरण गहूं किसकी स्वामी शरण गहूं मैं किसकी
तुम बिन और न दूजा तुम बिन और न दूजा आस करूं मैं जिसकी
ॐ जय जगदीश हरे……
तुम पूरण परमात्मा तुम अन्तर्यामी स्वामी तुम अन्तर्यामी
पारब्रह्म परमेश्वर पारब्रह्म परमेश्वर तुम सब के स्वामी
ॐ जय जगदीश हरे………….
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता स्वामी तुम पालनकर्ता
मैं मूरख फलकामी मैं सेवक तुम स्वामी कृपा करो भर्ता
ॐ जय जगदीश हरे……
तुम हो एक अगोचर सबके प्राणपति स्वामी सबके प्राणपति
किस विधि मिलूं दयामय किस विधि मिलूं दयामय तुमको मैं कुमति
ॐ जय जगदीश हरे……..
दीन-बन्धु दुःख-हर्ता ठाकुर तुम मेरे स्वामी रक्षक तुम मेरे
अपने हाथ उठाओ अपने शरण लगाओ द्वार पड़ा तेरे
ॐ जय जगदीश हरे……..
विषय-विकार मिटाओ पाप हरो देवा स्वमी पाप हरो देवा
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ सन्तन की सेवा
ॐ जय जगदीश हरे ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट दास जनों के संकट क्षण में दूर करे ॐ जय जगदीश हरे
ॐ जय जगदीश हरे – Om Jai Jagadish Hare भगवान विष्णु की आरती
