प्यार की मंज़िल – Pyar Ki Manzil, Md.Rafi, Ziddi
“Pyar Ki Manzil” फ़िल्म ज़िद्दी का एक रूमानी और दिल को छू लेने वाला गीत है। यह गाना प्रेम के उस सफर को दर्शाता है, जिसमें विश्वास, समर्पण, और अपनापन झलकता है। मोहम्मद रफ़ी की आवाज़, खेमचंद प्रकाश का सुरीला संगीत, और पंडित इंद्र के भावपूर्ण शब्दों ने इस गीत को अमर बना दिया है।

प्यार की मंज़िल – Pyar Ki Manzil Song Credits
- Movie/Album: ज़िद्दी (1964)
- Music By: एस.डी.बर्मन
- Lyrics By: हसरत जयपुरी
- Singer : मोहम्मद रफ़ी
प्यार की मंज़िल – Pyar Ki Manzil Lyrics in Hindi
प्यार की मंज़िल मस्त सफ़र
तुम हो हसीं हम हैं जवाँ
सामने तुम हो फिर भी हमें
होश नहीं हम हैं कहाँ
प्यार की मंज़िल…
यूँ ही सताऊँगा दिन और रात
जब तक न दोगी तुम हाथों में हाथ
ये ज़िद भी है कितनी हमको देखना है
प्यार की मंज़िल…
दम से हमारे है तुम पर बहार
एहसान मानो जी किया तुमसे प्यार
जलवे तो लाखों हैं कौन पूछता है
प्यार की मंज़िल…
मानो या न मानो जी तुम हो हसीं
अजी दिल की बातों का कर लो यक़ीं
मेरे दिल को तेरे दिल से प्यार हो गया है
प्यार की मंज़िल…
