रात भर तन्हा – Raat Bhar Tanha – Hariharan, Dil Ki Baat
“Raat Bhar Tanha” एक खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली ग़ज़ल है जिसे हरिहरन ने अपनी सुरीली आवाज़ में गाया है। हरिहरन की आवाज़ में जो नजाकत और सादगी है, वह इस ग़ज़ल को और भी मार्मिक बना देती है। ग़ज़ल की थीम अकेलापन, प्यार में बिछड़ने का दर्द और दिल की गहराइयों में छिपी तन्हाई को व्यक्त करती है। हरिहरन ने अपनी खास शैली से इस ग़ज़ल को श्रोताओं के दिलों तक पहुँचाया है।

रात भर तन्हा – Raat Bhar Tanha Song Credits
- Movie/Album: दिल की बात
- Year : 1990
- Music: हरिहरन
- Lyrics : इब्राहिम अश्क़
- Singer : हरिहरन
रात भर तन्हा – Raat Bhar Tanha Lyrics in Hindi
रात भर तन्हा रहा, दिन भर अकेला मैं ही था
शहर की आबादियों में अपने जैसा मैं ही था
रात भर तन्हा रहा…
मैं ही दरिया, मैं ही तूफ़ाॅं, मैं ही था हर मौज भी
मैं ही ख़ुद को पी गया, सदियों से प्यासा मैं ही था
शहर की आबादियों…
किसलिए कतरा के जाता है मुसाफ़िर दम तो ले
आज सूखा पेड़ हूॅं कल तेरा साया मैं ही था
शहर की आबादियों…
कितने जज़्बों की निराली ख़ुशबुऍं थी मेरे पास
कोई इनका चाहने वाला नहीं था मैं ही था
शहर की आबादियों…
