शाम होने को है – Shaam Hone Ko Hai, Jagjit Singh, Soz
“Shaam Hone Ko Hai” एक ऐसा गीत है जिसे सिर्फ सुना नहीं जाता — इसे महसूस किया जाता है। यह उन गीतों में से है जो जीवन की रफ्तार को कुछ पल के लिए थाम लेते हैं और आत्मा को भीतर तक छू जाते हैं।

शाम होने को है – Shaam Hone Ko Hai Credits
- Movie/Album: सोज़ (2001)
- Music : जगजीत सिंह
- Lyrics : जावेद अख्तर
- Singer : जगजीत सिंह
शाम होने को है – Shaam Hone Ko Hai Lyrics in Hindi
शाम होने को है
लाल सूरज समंदर में खोने को है
और उसके परे कुछ परिंदे कतारें बनाए
उन्हीं जंगलों को चले
जिनके पेड़ों की शाखों पे हैं घोंसले
ये परिंदे वहीं लौटकर जाएँगे
और सो जाएँगे
शाम होने को है…
शाम होने को है
लाल सूरज समंदर में खोने को है
हम ही हैरान हैं
इस मकानों के जंगल में
अपना कोई भी ठिकाना नहीं
शाम होने को है हम कहाँ जायेंगे
शाम होने को है…
