तुम अगर साथ देने – Tum Agar Saath Dene Ka, Mahendra Kapoor, Hamraaz
“Tum Agar Saath Dene Ka” एक ऐसा गीत है जो प्रेम की गहराई, जीवन की कठिनाइयों और साथी के भरोसे को बेहद संवेदनशील अंदाज़ में बयां करता है। यह गीत आशा की लौ है, जो यह जताता है कि अगर प्रेम में साथ मिल जाए तो दुनिया की कोई भी मुश्किल छोटी हो जाती है। साहिर लुधियानवी की सूझबूझ भरी शायरी, रवि का मधुर संगीत और महेंद्र कपूर की दृढ़ आवाज़ इस गीत को अविस्मरणीय बना देते हैं।

तुम अगर साथ देने – Tum Agar Saath Dene Ka Song Credits
- Movie/Album: हमराज़ (1967)
- Music : रवि
- Lyrics : साहिर लुधियानवी
- Singer : महेंद्र कपूर
तुम अगर साथ देने – Tum Agar Saath Dene Ka Song Hindi Lyrics
तुम अगर साथ देने का वादा करो
मैं यूँ ही मस्त नगमे लुटाता रहूँ
तुम मुझे देख कर मुस्कुराती रहो
मैं तुम्हें देख कर गीत गाता रहूँ
कितने जलवे फिज़ाओं में बिखरे मगर
मैंने अब तक किसी को उतारा नहीं
तुमको देखा तो नज़रें ये कहने लगी
हमको चेहरे से हटना गंवारा नहीं
तुम अगर मेरी नज़रों के आगे रहो
मैं हर एक शय से नज़रें चुराता रहूँ
तुम अगर साथ देने का…
मैंने ख़्वाबों में बरसों तराशा जिसे
तुम वही संगमरमर की तस्वीर हो
तुम न समझो तुम्हारा मुकद्दर हूँ मैं
मैं समझता हूँ तुम मेरी तकदीर हो
तुम अगर मुझको अपना समझने लगो
मैं बहारों की महफ़िल सजाता रहूँ
तुम अगर साथ देने का…
मैं अकेला बहुत देर चलता रहा
अब सफ़र ज़िन्दगानी का कटता नहीं
जब तलक कोई रंगीं सहारा न हो
वक़्त काफिर जवानी का कटता नहीं
तुम अगर हमकदम बनके चलती रहो
मैं ज़मीन पर सितारे बिछाता रहूँ
तुम अगर साथ देने का…
