Tumse Door Reh Ke

तुमसे दूर रह के – Tumse Door Reh Ke, Md.Rafi, Lata Mangeshkar, Adalat

फ़िल्म अदालत का यह गीत “Tumse Door Reh Ke” प्यार, तड़प और दिल की गहराइयों से जुड़ी भावनाओं को खूबसूरती से पेश करता है। मोहम्मद रफ़ी और लता मंगेशकर जैसे दिग्गज गायकों की आवाज़ में यह गीत सदाबहार प्रेम गीतों में अपनी खास जगह रखता है।

तुमसे दूर रह के
Tumse Door Reh Ke

तुमसे दूर रह के – Tumse Door Reh Ke Song Credits

  • Movie/Album: अदालत (1976)
  • Music By:कल्याणजी-आनंदजी
  • Lyrics By: गुलशन बावरा
  • Singer : मो.रफ़ी, लता मंगेशकर

तुमसे दूर रह के – Tumse Door Reh Ke Song Lyrics in Hindi

तुमसे दूर रह के
हमने जाना प्यार क्या है
दिल ने माना यार क्या है

तुमको पाके ना पहलू में लगता था यूँ
जीते हैं किसलिए और ज़िंदा है क्यों
हम भी रहते थे बेचैन से हर घड़ी
बिन तुम्हारे तो वीरान थी ज़िन्दगी
तुमसे दूर रह के…

दूरियाँ किसलिये, मिल गये हैं जो हम
अब तो होने दो अरमान पूरे सनम
वक़्त आने पे मिट जायेंगी दूरियाँ
जब न होंगी ज़माने की मजबूरियाँ
तुमसे दूर रह के…

तुमसे दूर रह के – Tumse Door Reh Ke Song 

 

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