वन में चले रघुराई – Van Me Chale Raghurai, Sahib Das
“Van Me Chale Raghurai” भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है, जो हमें श्रीराम के वनगमन प्रसंग में ले जाती है। यह भजन भक्ति, त्याग, धर्म और मर्यादा का एक अद्भुत संगम है, जिसे सुनकर हर रामभक्त का हृदय वंदन और अश्रुपूरित हो उठता है।

वन में चले रघुराई – Van Me Chale Raghurai Bhajan Credits
- Song – वन में चले रघुराई,
- Singer – साहिब दास
वन में चले रघुराई – Van Me Chale Raghurai Bhajan Lyrics in Hindi
वन में चले रघुराई,
संग उनके सीता माई,
राजा जनक की जाई,
राजा जनक की जाई ॥
आगे आगे राम चले है,
पीछे लक्ष्मण भाई,
जिनके बिच में चले जानकी,
शोभा बरनी न जाई,
वन को चले रघुराई,
संग उनके सीता माई,
राजा जनक की जाई,
राजा जनक की जाई ॥
राम बिना मेरी सुनी रे अयोध्या,
लक्ष्मण बिन चतुराई,
सीता बिना सुनी रे रसोई,
कौन करे ठकुराई,
वन को चले रघुराई,
संग उनके सीता माई,
राजा जनक की जाई,
राजा जनक की जाई ॥
सावन बरसे भादव गरजे,
पवन चले पुरवाई,
कौन बिरख निचे भीजत होंगे,
राम लखन दो भाई,
वन को चले रघुराई,
संग उनके सीता माई,
राजा जनक की जाई,
राजा जनक की जाई ॥
रावण मार राम घर आये,
घर घर बंटती बधाई,
माता कौशल्या करत आरती,
शोभा बरनी न जाई,
वन को चले रघुराई,
संग उनके सीता माई,
राजा जनक की जाई,
राजा जनक की जाई ॥
वन में चले रघुराई,
संग उनके सीता माई,
राजा जनक की जाई,
राजा जनक की जाई ॥
