ये हौंसला कैसे झुके – Ye Haunsla Kaise Jhuke (Shafqat Amanat Ali Khan, Dor
“Ye Haunsla Kaise Jhuke” गाना एक प्रेरणा और आत्मबल का प्रतीक बन चुका है। इसे गाया है पाकिस्तान के प्रसिद्ध सूफी गायक शफ़क़त अमानत अली खान ने, जिनकी आवाज़ में एक अनोखी रूहानियत और भावनाओं की गहराई है। उनकी गायकी में ना कोई दिखावा है, ना कोई बनावट – बस एक सच्ची पुकार, जो दिल के भीतर तक उतरती है। जब वह कहते हैं

ये हौंसला कैसे झुके – Ye Haunsla Kaise Jhuke Song Credits
- Movie/Album: डोर (2006)
- Music : सलीम-सुलेमान
- Lyrics : मीर अली हुसैन
- Singers : शफ़क़त अमानत अली खान
ये हौंसला कैसे झुके – Ye Haunsla Kaise Jhuke Song Lyrics in Hindi
ये हौंसला कैसे झुके
ये आरज़ू कैसे रुके
मंज़िल मुश्किल तो क्या
धुंधला साहिल तो क्या
तन्हाँ ये दिल तो क्या
राह पे काँटे बिखरे अगर
उसपे तो फिर भी चलना ही है
शाम छुपा ले सूरज मगर
रात को एक दिन ढलना ही है
रुत ये टल जाएगी
हिम्मत रंग लाएगी
सुबह फिर आएगी
होगी हमें जो रहमत अदा
धूप कटेगी साये तले
अपनी खुदा से है ये दुआ
मंज़िल लगा ले हमको गले
जुर्रत सौ बार रहे
ऊँचा इकरार रहे
ज़िन्दा हर प्यार रहे
रिश्ते भरोसे चाहत यकीं
उन सबका दामन अब चाक है
समझे थे हाथों में है ज़मीं
मुट्ठी जो खोली, बस ख़ाक है
दिल में ये शोर है क्यूँ
ईमाँ कमज़ोर है क्यूँ
नाज़ुक ये डोर है क्यूँ
