ज़रुरत – Zaroorat, Mustafa Zahid, Ek Villain
“Zaroorat” सिर्फ एक प्रेम गीत नहीं है, ये एक अहसास है जब कोई किसी की ज़िंदगी में ज़रूरत से भी ज़्यादा बन जाता है। इसमें जुनून है, इश्क़ है और तन्हाई की कसक भी है। यह गाना हर उस दिल की कहानी कहता है जो मोहब्बत में खुद को खो चुका है।

ज़रुरत – Zaroorat Song Credits
- Movie/Album: एक विलेन (2014)
- Music By: मिथुन
- Lyrics : मिथुन
- Singer : मुस्तफा ज़ाहिद
ज़रुरत – Zaroorat Song Lyrics in Hindi
ये दिल तन्हा क्यूं रहे
क्यूं हम टुकड़ों में जिये
क्यूं रूह मेरी ये सहेमैं अधूरा जी रहा हूँ
हरदम ये कह रहा हूँ
मुझे तेरी ज़रूरत है…
अंधेरों से था मेरा रिश्ता बड़ा
तूने ही उजालों से वाक़िफ़ किया
अब लौटा मैं हूँ इन अंधेरों में फिर
तो पाया है खुद को बेगाना यहाँ
तन्हाई भी मुझसे खफा हो गयी
बंजरों ने भी ठुकरा दिया
मैं अधूरा जी रहा हूँ
खुद पर ही इक सज़ा हूँ
मुझे तेरी ज़रूरत है…
तेरे जिस्म की वो खुशबुएं
अब भी इन सांसों में ज़िंदा है
मुझे हो रही इनसे घुटन
मेरे गले का ये फंदा है
तेरे चूड़ियों की वो खनक
यादों के कमरे में गूँजे है
सुनकर इसे, आता है याद
हाथों में मेरे जंजीरें हैं
तु ही आके इनको निकाल ज़रा
कर मुझे यहाँ से रिहा
मैं अधूरा जी रहा हूँ
ये सदायें दे रहा हूँ
मुझे तेरी ज़रूरत है…
