ज़िन्दगी जब भी – Zindagi Jab Bhi, Talat Aziz, Umrao Jaan
“Zindagi Jab Bhi…” केवल एक ग़ज़ल नहीं, बल्कि एक जज़्बात है, जो दिल की गहराइयों से उठता है और सुनने वाले की रूह तक उतर जाता है। तलत अज़ीज़ की आवाज़, शहरयार की शायरी और ख़य्याम की धुन मिलकर इसे उर्दू ग़ज़लों के इतिहास में एक अमूल्य रत्न बनाते हैं।

ज़िन्दगी जब भी – Zindagi Jab Bhi Ghazal Credits
- Movie/Album: उमराव जान (1981)
- Music By: खैय्याम
- Lyrics : शहरयार
- Singer : तलत अज़ीज़
ज़िन्दगी जब भी – Zindagi Jab Bhi Ghazal Lyrics
ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें
ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें
सुर्ख फूलों से महक उठती हैं दिल की राहें
दिन ढले यूँ तेरी आवाज़ बुलाती है हमें
ज़िन्दगी जब भी तेरी…
याद तेरी कभी दस्तक, कभी सरगोशी से
रात के पिछले पहर रोज़ जगाती है हमें
ज़िन्दगी जब भी तेरी…
हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यूँ है
अब तो हर वक़्त यही बात सताती है हमें
ज़िन्दगी जब भी तेरी…
