तुमसे कहूँ इक बात – Tumse Kahoon Ek Baat, Md.Rafi, Dastak
“Tumse Kahoon Ek Baat” एक ऐसा गीत है जिसे केवल कानों से नहीं, दिल से सुना जाता है। मोहम्मद रफ़ी की मखमली आवाज़, मदन मोहन का आत्मीय संगीत और मजरूह सुल्तानपुरी की सादा लेकिन असरदार शायरी तीनों मिलकर इस गीत को शुद्ध प्रेम का प्रतीक बना देते हैं। यह गाना उन प्रेमियों के लिए है जो बोलना चाहते हैं, लेकिन डरते हैं कि कहीं बातों में उनकी भावनाओं की कोमलता टूट न जाए।

तुमसे कहूँ इक बात – Tumse Kahoon Ek Baat Song Credits
- Movie/Album: दस्तक (1970)
- Music : मदन मोहन
- Lyrics : मजरूह सुल्तानपुरी
- Singer : मो.रफ़ी
तुमसे कहूँ इक बात – Tumse Kahoon Ek Baat Song Lyrics in Hindi
तुमसे कहूँ इक बात परों सी हल्की-हल्की
रात मेरी है छाँव तुम्हारे ही आँचल की
तुमसे कहूँ इक बात…
सोई गलियाँ बाँह पसारे आँखें मीचे
मैं दुनिया से दूर घनी पलकों के नीचे
देखूँ चलते ख़्वाब लकीरों पर काजल की
तुमसे कहूँ इक बात…
धुंधली-धुंधली रैन मिलन का बिस्तर जैसे
खुलता छुपता चाँद सेज के ऊपर जैसे
चलती फिरती खाट हवाओं पर बादल की
तुमसे कहूँ इक बात…
है भीगा सा जिस्म तुम्हारा इन हाथों में
बाहर नींद भरा पंछी भीगी शाखों में
और बरखा की बूंद बदन से ढलकी-ढलकी
तुमसे कहूँ इक बात…
