कोई पत्ता हिले – Koi Patta Hile, Hariharan, Gulfaam
“Koi Patta Hile” एक ऐसा गीत है जो बाह्य शांति और आंतरिक तूफान के बीच की खामोशी को स्वर देता है। हरिहरन की मखमली आवाज़ इसे एक ऐसा स्पर्श देती है जो आत्मा तक पहुंचता है। ज़फ़र कलीम की शायरी इसमें सूफीवाद का तत्व जोड़ती है।

कोई पत्ता हिले – Koi Patta Hile Song Credits
- Movie/Album: गुलफ़ाम (1994)
- Music : हरिहरन
- Lyrics : ज़फ़र कलीम
- Singer : हरिहरन
कोई पत्ता हिले – Koi Patta Hile Song
कोई पत्ता हिले हवा तो चले
कौन अपना है ये पता तो चले
कोई पत्ता हिले…
तू सितम से खींच हाथ अभी
और कुछ दिन ये सिलसिला तो चले
कौन अपना है…
मंज़िलें ख़ुद क़रीब आएँगी
ऐ अज़ीज़ान-ओ-काफ़िला तो चले
कौन अपना है…
शहर हो गाँव हो या घर अपना
आब-ओ-दाना ही उठ गया तो चले
कौन अपना है…
हर किसी से मिला करो कि ‘ज़फ़र’
कौन कैसा है, कुछ पता तो चले
कौन अपना है…
