रिमझिम के तराने ले के

रिमझिम के तराने ले के – Rimjhim Ke Tarane Le Ke (Md.Rafi, Geeta Dutt, Kala Bazar)

फ़िल्म “काला बाज़ार” का यह गाना “रिमझिम के तराने ले के” भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह गीत न केवल संगीत प्रेमियों के दिलों में बसता है, बल्कि इसके मधुर बोल और धुन हर मौसम में ताजगी का अनुभव कराते हैं।

1960 में रिलीज़ हुई फ़िल्म “काला बाज़ार” एक रोमांटिक ड्रामा है, जिसका निर्देशन विजय आनंद ने किया है। फ़िल्म में देव आनंद, वहीदा रहमान, नंदा, और विजय आनंद मुख्य भूमिकाओं में हैं। फ़िल्म की कहानी एक ऐसे युवक पर आधारित है जो काले बाज़ार में टिकट बेचने का काम करता है और फिर एक नेक काम करने का फैसला करता है।

संगीतकार का परिचय : इस गीत के संगीतकार एस.डी. बर्मन हैं, जो भारतीय सिनेमा के महानतम संगीतकारों में से एक हैं। उनकी संगीत रचनाएँ सदाबहार मानी जाती हैं और यह गीत भी उनमें से एक है।

गीतकार का परिचय : इस गीत के बोल लिखे हैं मजरूह सुल्तानपुरी ने, जो अपनी काव्यात्मक प्रतिभा के लिए जाने जाते हैं। उनके द्वारा लिखे गए बोल सीधे दिल को छूते हैं।

रिमझिम के तराने ले के
रिमझिम के तराने ले के

रिमझिम के तराने ले के – Rimjhim Ke Tarane Le Ke, Song Details

  • Movie/Album: काला बाज़ार
  • Year : 1960
  • Music By: एस.डी.बर्मन
  • Lyrics By: शैलेन्द्र
  • Performed By: मो.रफ़ी, गीता दत्त

रिमझिम के तराने ले के – Rimjhim Ke Tarane Le Ke Lyrics in Hindi

 

रिमझिम के तराने ले के आई बरसात
याद आये किसी से वो पहली मुलाक़ात
रिमझिम के तराने…

भीगे तनमन पड़े रस की फुहार
प्यार का संदेसा लाई बरखा बहार
मैं ना बोलू आँखे करे अँखियों से बात
रिमझिम के तराने…

सुन के मतवाले काले बादलों का शोर
रुमझुम, घुमघुम नाचे मन का मोर
सपनों का साथी चल रहा है मेरे साथ
रिमझिम के तराने…

जब मिलते हो तुम तो
छिड़ते हैं दिल के तार
मिलने को तुमसे मैं
क्यूँ था बेकरार
रह जाती हैं क्यों होठों तक
आ के दिल की बात
रिमझिम के तराने…

रिमझिम के तराने ले के – Rimjhim Ke Tarane Le Ke , Video Song …

 

 

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