चाक-ए-जिगर के – Chak-e-Jigar Ke, Jagjit Singh, Love is Blind
“Chak-e-Jigar Ke” जगजीत सिंह की उन soulful ग़ज़लों में से एक है, जिसमें दर्द, तड़प और मोहब्बत की कशिश एक साथ महसूस होती है। नदीम परमार की शायरी और जगजीत सिंह का स्वर मिलकर इस ग़ज़ल को एक ऐसी भावलोक यात्रा बना देते हैं जिसमें श्रोता खो जाता है।

चाक-ए-जिगर के – Chak-e-Jigar Ke Song Credits
- Movie/Album: लव इज़ ब्लाइंड (1998)
- Music : जगजीत सिंह
- Lyrics : नदीम परमार
- Singers : जगजीत सिंह
चाक-ए-जिगर के – Chak-e-Jigar Ke Song
चाक-ए-जिगर के सी लेते हैं
जैसे भी हो जी लेते हैं
चाक जिगर के…
दर्द मिले तो सह लेते हैं
अश्क मिले तो पी लेते हैं
चाक-ए-जिगर के…
आप कहें तो मर जाएँ हम
आप कहें तो जी लेते हैं
चाक-ए-जिगर के…
बेज़ारी के अंधियारे में
जीने वाले जी लेते हैं
चाक जिगर के…
हम तो हैं उन फूलों जैसे
जो काँटों में जी लेते हैं
चाक जिगर के…
