आज हम बिछड़े हैं तो कितने – Aaj Hum Bichhde Hain To Kitne, Jagjit Singh, Love is Blind
“Aaj Hum Bichhde Hain To Kitne” जगजीत सिंह की उन ग़ज़लों में से है जो दिल के सबसे गहरे कोनों को छू जाती है। शाहिद कबीर के दर्दभरे अशआर और जगजीत सिंह की मख़मली आवाज़ मिलकर ऐसा असर पैदा करते हैं कि सुनने वाला खामोशी में डूब जाता है। यह ग़ज़ल जुदाई के एहसास, टूटते रिश्तों और दिल की बेचैनी को बेहद खूबसूरती से बयां करती है।

आज हम बिछड़े हैं तो कितने – Aaj Hum Bichhde Hain To Kitne Ghazal Credits
- Movie/Album: लव इज़ ब्लाइंड (1998)
- Music : जगजीत सिंह
- Lyrics : शाहिद कबीर
- Singer : जगजीत सिंह
आज हम बिछड़े हैं तो कितने – Aaj Hum Bichhde Hain To Kitne Ghazal Lyrics in Hindi
आज हम बिछड़े हैं तो कितने रंगीले हो गए
मेरी आँखें सुर्ख़, तेरे हाथ पीले हो गए
कब की पत्थर हो चुकी थी, मुंतज़िर आँखें मगर
छू के जब देखा तो मेरे हाथ गीले हो गए
आज हम बिछड़े हैं तो…
जाने क्या एहसास साज़-ए-हुस्न के तारों में है
जिनको छूते ही मेरे नग़मे रसीले हो गए
आज हम बिछड़े हैं तो…
अब कोई उम्मीद है ‘शाहिद’, न कोई आरज़ू
आसरे टूटे तो जीने के वसीले हो गए
आज हम बिछड़े हैं तो…
