हम हैं मता-ए-कूचा – Hum Hain Mata-e-Koocha, Lata Mangeshkar, Dastak
“Hum Hain Mata-e-Koocha” केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक सामाजिक टिप्पणी है एक स्त्री के दृष्टिकोण से उस दुनिया की कहानी जिसे वह हर रोज़ झेलती है। लता मंगेशकर की आवाज़ इस व्यथा को स्वरों में ढालती है, मदन मोहन का संगीत उस पीड़ा को सजाता है, और मजरूह साहब की शायरी उस पीड़ा को शब्दों में ढालती है।

हम हैं मता-ए-कूचा – Hum Hain Mata-e-Koocha Song Credits
- Movie/Album: दस्तक (1970)
- Music : मदन मोहन
- Lyrics : मजरूह सुल्तानपुरी
- Singer : लता मंगेशकर
हम हैं मता-ए-कूचा – Hum Hain Mata-e-Koocha Song Lyrics in Hindi
हम हैं मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार की तरह
उठती है हर निगाह खरीदार की तरह
वो तो कहीं हैं और मगर दिल के आस पास
फिरती है कोई शह निगाह-ए-यार की तरह
हम हैं मता-ए-कूचा…
मजरूह लिख रहे हैं वो अहल-ए-वफ़ा का नाम
हम भी खड़े हुए हैं गुनहगार की तरह
हम हैं मता-ए-कूचा…
