राही मनवा दुःख की चिंता – Raahi Manva Dukh Ki Chinta, Md.Rafi, Dosti
“Raahi Manva Dukh Ki Chinta” एक प्रेरणात्मक और आत्मबल को जगाने वाला गीत है, जिसे मोहम्मद रफ़ी ने अपनी भावनाओं से भरपूर आवाज़ में गाया है। रफ़ी साहब की गायकी में न सिर्फ संगीत है, बल्कि जीवन का दर्शन है। उनकी आवाज़ में ऐसा संयम, अपनापन और दिलासा है कि सुनने वाला अपने दुख भूलकर एक नई ऊर्जा से भर जाता है।

राही मनवा दुःख की चिंता – Raahi Manva Dukh Ki Chinta Song Credits
- Movie/Album: दोस्ती (1964)
- Music By: लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
- Lyrics : मजरूह सुल्तानपुरी
- Singer : मो.रफ़ी
राही मनवा दुःख की चिंता – Raahi Manva Dukh Ki Chinta Song
दुःख हो या सुख
जब सदा संग रहे ना कोय
फ़िर दुःख को अपनाईये
के जाए तो दुःख ना होय
राही मनवा दुःख की चिंता क्यूँ सताती है
दुःख तो अपना साथी है
सुख है इक छाँव ढलती, आती है, जाती है
दुःख तो अपना साथी है
दूर है मंजिल दूर सही
प्यार हमारा क्या कम है
पग में काँटे लाख सही
पर ये सहारा क्या कम है
हमराह तेरे कोई अपना तो है
सुख है इक छाँव ढलती…
दुःख हो कोई तब जलते हैं
पथ के दीप निगाहों में
इतनी बड़ी इस दुनिया की
लंबी अकेली राहों में
हमराह तेरे कोई अपना तो है
सुख है इक छाँव…
