श्री गणेशपञ्चरत्नम् स्तोत्रम – Shri Ganesha Pancharatnam Stotram, M.S. Subbulakshmi, Radha Viswanathan
“Shri Ganesha Pancharatnam Stotram” आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक अत्यंत प्रसिद्ध और पवित्र स्तोत्र है, जो भगवान गणेश की महिमा का गुणगान करता है। इसे पाँच श्लोकों में विभाजित किया गया है, जिनमें भगवान गणेश की कृपा, शक्ति, और अद्वितीय गुणों का उल्लेख है। यह स्तोत्र विशेष रूप से प्रातःकाल गाए जाने के लिए उपयुक्त है, जिससे भक्त अपने दिन की शुरुआत भगवान गणेश के आशीर्वाद से कर सकें।

श्री गणेशपञ्चरत्नम् स्तोत्रम – Shri Ganesha Pancharatnam Stotram Credits:
- Song Name: Ganesha Pancharatnam Stotram
- Singer : M.S. Subbulakshmi, Radha Viswanathan
- Music Director: Sri Adi Sankaracharya
- Lyricist: Traditional
श्री गणेशपञ्चरत्नम् स्तोत्रम – Shri Ganesha Pancharatnam Stotram Bhajan Lyrics
श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र!
मुदा करात्त मोदकं सदा विमुक्ति साधकम् ।
कलाधरावतंसकं विलासिलोक रक्षकम् ।
अनायकैक नायकं विनाशितेभ दैत्यकम् ।
नताशुभाशु नाशकं नमामि तं विनायकम् ॥ 1 ॥
नतेतराति भीकरं नवोदितार्क भास्वरम् ।
नमत्सुरारि निर्जरं नताधिकापदुद्ढरम् ।
सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरम् ।
महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥ 2 ॥
समस्त लोक शङ्करं निरस्त दैत्य कुञ्जरम् ।
दरेतरोदरं वरं वरेभ वक्त्रमक्षरम् ।
कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करम् ।
मनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ॥ 3 ॥
अकिञ्चनार्ति मार्जनं चिरन्तनोक्ति भाजनम् ।
पुरारि पूर्व नन्दनं सुरारि गर्व चर्वणम् ।
प्रपञ्च नाश भीषणं धनञ्जयादि भूषणम् ।
कपोल दानवारणं भजे पुराण वारणम् ॥ 4 ॥
नितान्त कान्ति दन्त कान्ति मन्त कान्ति कात्मजम् ।
अचिन्त्य रूपमन्त हीन मन्तराय कृन्तनम् ।
हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनाम् ।
तमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि सन्ततम् ॥ 5 ॥
महागणेश पञ्चरत्नमादरेण योऽन्वहं ।
प्रजल्पति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् ।
अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रताम् ।
समाहितायु रष्टभूति मभ्युपैति सोऽचिरात् ॥ 6 ॥
श्रीमत् शंकर भगित्पादकृत श्रीगणेशपञ्चरत्न स्तोत्रम् संपूणकम्।
