ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं – Zindagi Se Badi Saza Hi Nahin, Jagjit Singh
Zindagi Se Badi Saza Hi Nahin ग़ज़ल दर्द, तजुर्बे और जीवन की कड़वी सच्चाइयों को बेहद मार्मिक अंदाज़ में पेश करती है। जगजीत सिंह की जादुई, गहरी और संवेदनशील आवाज़ इस ग़ज़ल के हर शेर में जान डाल देती है। उनकी गायकी की नज़ाकत, ठहराव और भावों का संतुलन इसे और भी प्रभावशाली बनाता है। कृष्ण बिहारी ‘नूर’ द्वारा लिखे गए शब्द जीवन की पेचीदगियों, अकेलेपन के दर्द और रिश्तों में होने वाली उलझनों को सरल लेकिन गहरे अंदाज़ में बयां करते हैं। “ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं, और क्या जुर्म है पता ही नहीं…” जैसे शेर दिल को भीतर तक छू जाते हैं।

ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं – Zindagi Se Badi Saza Hi Nahin Ghazal Credits
- Movie/Album: हंगामा है क्यों बरपा (1985)
- Music : जगजीत सिंह
- Lyrics : कृष्ण बिहारी ‘नूर’
- Singers : जगजीत सिंह
ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं – Zindagi Se Badi Saza Hi Nahin Ghazal Lyrics in Hindi
ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं
और क्या जुर्म है पता ही नहीं
ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा…
इतने हिस्सों में बट गया हूॅं मैं
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं
ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा…
सच घटे या बढ़े तो सच ना रहे
झूट की कोई इंतिहा ही नहीं
ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा…
जड़ दो चांदी में चाहे सोने में
आईना झूठ बोलता ही नहीं
ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा…
