फ़ासिला तो है मगर – Faasila To Hai Magar, Chitra Singh, Jagjit Singh, Someone Somewhere
“Faasila To Hai Magar” सिर्फ़ मोहब्बत की नहीं, भरोसे और अपनत्व की भी ग़ज़ल है। यह बताती है कि अगर दिल मिल जाएँ, तो कोई फासला फ़ासला नहीं रहता। दो आवाज़ें, एक एहसास — और सुनने वाले के लिए एक अमिट अनुभव।

फ़ासिला तो है मगर – Faasila To Hai Magar
Movie/Album: समवन समवेयर (1986)
Music : जगजीत सिंह
Lyrics : शमीम करहानी
Singers : चित्रा सिंह, जगजीत सिंह
फ़ासिला तो है मगर – Faasila To Hai Magar
फ़ासिला तो है मगर, कोई फ़ासिला नहीं
मुझ से तुम जुदा सही, दिल से तो जुदा नहीं
फ़ासिला तो है मगर…
आसमाँ की फ़िक्र क्या, आसमाँ ख़फ़ा सही
आप ये बताइए, आप तो ख़फ़ा नहीं
कश्तियाँ नहीं तो क्या, हौसले तो पास हैं
कह दो ना ख़ुदाओं से, तुम कोई ख़ुदा नहीं
लीजिए बुला लिया, आपको ख्याल में
अब तो देखिए हमें, कोई देखता नहीं
आइए चराग़-ए-दिल, आज ही जलाएँ हम
कैसी कल हवा चले, कोई जानता नहीं
फ़ासिला तो है मगर…
